अभीगुज़रेदिनोंकीकुछसदाएँशोरकरतीहैं
दरीचेबंदरहनेदो,हवाएँशोरकरतीहैं
यहीतोफ़िक्रकेजलतेपरोंपेताज़ियानाहै
किहरतारीककमरेमेंदुआएँशोरकरतीहैं
कहानाथाहिसार-ए-इस्म-ए-आज़मखींचनेवाले
यहाँआसेबरहतेहैंबलाएँशोरकरतीहैं
हमेंभीतजरबाहैबे-घरीकाछतनहोनेका
दरिंदे,बिजलियाँ,कालीघटाएँशोरकरतीहैं
अभीगर्द-ए-सफ़रकेगिर्येकीहैगूँजकानोंमें
अभीक्यूँँमुंतज़िरख़ालीसराएँशोरकरतीहैं
हमेंसैराबरक्खाहैख़ुदाकाशुक्रहैउसने
जहाँबंजरज़मीनेंहोंअनाएँशोरकरतीहैं