कब किस बात से दिल टूटा है अपनी किस से यारी है
मेरी वहशत नाराज़ी है और वो सिर्फ़ तुम्हारी है
अँगड़ाई ने काले बादल डाल दिए हैं शानों पर
चाह ने गेसू खोल दिए हैं दिन ने रात गुज़ारी है
रूह से रूह का मेल है या'नी रूहों की परछाई में
जिस्म पे जिस्म की आराइश है शर्म की पर्दा-दारी है
मुझ को इन कलियों की रंगत और अदास क्या मतलब
भंवरो की फूलों से सिर्फ़ हवस की रिश्तेदारी है
हर एहसास नया इक लफ़्ज़ और हर इक लफ़्ज़ नया एहसास
जिस्मों की उर्यां तख़्ती पर पोरों की फ़नकारी है
इश्क़ जुनूँ है इश्क़ सुकूँ है इश्क़ ही रंज-ओ-गुमाँ या'नी इश्क़ दिलों का ऐब नहीं है ज़ेहनों की पुरकारी है
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