कुछ पता ही नहीं चल रहा ज़िन्दगी किस तरफ़ जा रही है
तेरा घर किस तरफ़ है मगर ये गली किस तरफ़ जा रही है
एक चेहरा अचानक चमकने लगा है मजाफ़ात में
चाँद को भी पता है मेरी रौशनी किस तरफ़ जा रही है
बाग़ से कुछ तअल्लुक़ हमारा भी था अब नहीं है तो क्या
जानते है ये फूलों भरी टोकरी किस तरफ़ जा रही है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Zahid Bashir
our suggestion based on Zahid Bashir
As you were reading Gaon Shayari Shayari