0

पास मेरे भी क्या नहीं होता - Afzal Ali Afzal

पास मेरे भी क्या नहीं होता
दूर अगर तू हुआ नहीं होता

तू जो मुझसे मिला नहीं होता
इश्क़ क्या है पता नहीं होता

हम जो इंसां कभी अगर होते
ज़ात का मस'अला नहीं होता

दर्द हद से गुज़र गया मौला
फिर भला क्यूँ दवा नहीं होता

चाहे उड़ ले तू आसमानों में
ऐसे  कोई  ख़ुदा  नहीं होता

हम अगर दोस्ती पे रुक जाते
दरमियाँ फ़ासला नहीं होता

है अजब मस'अला कि वो अफ़ज़ल
मेरा होकर मिरा नहीं होता

Afzal Ali Afzal
2

Share this on social media

Dosti Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Afzal Ali Afzal

As you were reading Shayari by Afzal Ali Afzal

Similar Writers

our suggestion based on Afzal Ali Afzal

Similar Moods

As you were reading Dosti Shayari