ज़माने छूट जाएँगे फ़साने छूट जाएँगे
जहाँ मिलते थे उन से वो ठिकाने छूट जाएँगे
वो हँसना घूमना फिरना वो कॉलेज की मटरगश्ती
जवानी के यहीं पर दिन सुहाने छूट जाएँगे
वो मेरे यार जो मैं ने अक़ीदत से कमाए हैं
नए मिल जाऍंगे लेकिन पुराने छूट जाएँगे
वो लड़की जिस के कॉलेज में कई लड़के दिवाने थे
वो लड़की घर बसा लेगी दिवाने छूट जाएँगे
जब आ जायेंगी जिम्मेदारियाँ सर पर हमारे भी
ये सब मक्कारियाँ, ये सब बहाने छूट जाएँगे
— Akash Rajpoot















