क्या तू जानेगा किसी शख़्स का हद पर होना
तू ने देखा नहीं क़तरे का समुंदर होना
हम जो छोटे हैं तो छोटा ही बना रहने दो
हम को अच्छा नहीं लगता है सितमगर होना
चाहकर भी वो नहीं जीतता है दुनिया से
कितना भाता है मेरे यार को कमतर होना
हाल बेकार करो दाढ़ी बढ़ा लो थोड़ी
सिर्फ़ दिल से नहीं दिखता है क़लंदर होना
बस बहत्तर ही हज़ारों के लिए काफ़ी हैं
जंग में कोई ज़रूरी नहीं लश्कर होना
— Aqib khan















