राहें अलग हुईं हैं इरादे अलग हुएदौलत से इश्क़ के यूँ लबादे अलग हुएइक्कीसवीं सदी है ज़रा देख भाल केराजा मरा है पहले, जो प्यादे अलग हुएपहले पहल तनाव था जो बढ़ता ही गयाफिर ज़ार ज़ार हो सभी वादे अलग हुएकुल जोड़ कर के रह गए पेचीदा पाँच छहजब उन के आस पास से सादे अलग हुए— Aqib khan