teri gali men to jaane ka hausla hi nahin | तेरी गली में तो जाने का हौसला ही नहीं

  - Aqib khan

तेरी गली में तो जाने का हौसला ही नहीं
करूँँ मैं ज़ख्म हरे फिर से सोचता ही नहीं

अजीब राह है जिस पर हमें है जाना मगर
कोई क़रीबी हमें आ के रोकता ही नहीं

कि तेरे बाद तो हम साथ साथ सब के गए
वो और बात है ये दिल मिरा गया ही नहीं

वो शख़्स जो सदा आँखों में है समाया हुआ
मिला तो कह दिया मैं तुमको जानता ही नहीं

ज़रा सा और दो ये दर्द कम पड़ा है मुझे
कि साँस चल रही है अब भी मैं मरा ही नहीं

रुके हुए थे इशारे पे एक जिसके वो फिर
ये कह के चल दिया मुझ सेे मैं तेरा था ही नहीं

बताया हिज्र के बारे में चारागर ने मुझे
ये मर्ज़ ऐसा है जिसकी कोई दवा ही नहीं

  - Aqib khan

Baaten Shayari

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