वो जा चुका और आँख तेरी अभी तलक क्यूँ भरी नहीं है
सवाल ये कुछ अजीब सा है के सहरा में क्यूँ नमी नहीं है
हसीन इतना के सब हसीनों को पीछे छोड़े जहाँ भी जाए
कमाल इतना के बे-वफ़ाई में उस सेे आगे कोई नहीं है
तमाम भँवरे इसी जुगत में लगे हुए हैं किसी तरह से
बना लें रस्ता वो दिल में उसके कली जो अब तक खिली नहीं है
तुम्हारे बारे में सच कहा है खराब लगना तो लाज़िमी है
तुम्हें ये इतनी जो लग रही है ये बात इतनी बुरी नहीं है
कहीं पे प्याला पकड़ के कोई ख़ुशी से झू
में ही जा रहा है
किसी को हैं तख़्त-ओ-ताज हासिल मगर ज़रा भी ख़ुशी नहीं है
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