फ़लां ने कहा है फ़लाने से हैं हम
की हुलिए से देखो दिवाने से हैं हम
हैं सुनते नहीं अब तो हम भी किसी की
बुरा इस
में क्या है ज़माने से हैं हम
हमें सुन के लोगों को राहत मिलेगी
रफ़ी के किसी प्यारे गाने से हैं हम
यहाँ हम सा दूजा कहाँ से मिलेगा
नई सी है दुनिया पुराने से हैं हम
— Alankrat Srivastava















