मैं पागल हो चुका हूँ इश्क़ में ये लोग कहते हैं
बस इक तू ही नहीं कहती जो सारे लोग कहते हैं
ये मैंने कब कहा ऐ यार तूने बेवफ़ाई की
गड़े ख़ंजर हैं मेरी पीठ में ये लोग कहते हैं
तलाश-ए-यार में अब घाव भी रिसने लगे मेरे
कि मिलता है ख़ुदा भी ढूँढने से लोग कहते हैं
तुम्हें जब ये पता है मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा हूँ
तो फिर तुम भूल जाओ जो ये झूटे लोग कहते हैं
भरे हैं याद में तेरी न जाने कितने ही पन्ने
सियाही रच गई है उँगलियों पे लोग कहते हैं
भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना
मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
तुम्हारा राज है जो फ़ैसला चाहे सुना दो तुम
मेरे हक़ में तो बस दो चार सच्चे लोग कहते हैं
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