kuchh der to dare teri jaadugari se ham | कुछ देर तो डरे तेरी जादूगरी से हम

  - Amaan Pathan

कुछ देर तो डरे तेरी जादूगरी से हम
फिर देखने लगे तुझे संजीदगी से हम

जो भी मिला वो रख लिया हमने सहेज कर
अब और क्या ही माँगते इस आशिक़ी से हम

यूँ हर किसी से भी कोई मिलता है क्या गले
उकता गये हैं अब तिरी आवारगी से हम

बस एक अंधेरे ने ही निभाई है दोस्ती
क्यूँ इल्तिजा करें तू बता रौशनी से हम

पहले पहल तो लड़ लिए अल्लाह से मग़र
अब पेश आ रहे हैं बड़ी आजिज़ी से हम

यह जानते हैं हम या ख़ुदा जानता है बस
कैसे निकल के आये हैं उस तीरगी से हम

अब क्यों अमान ढूँढते हैं उसको दर बदर
जिसको निकाल फेंक चुके ज़िंदगी से हम

  - Amaan Pathan

Andhera Shayari

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