ज़िन्दगी थी मेरी भी आँखों में
जब तलक इक परी थी आँखों में
इसलिए भी ख़ुदा के पास रहा
इक नमाज़न बसी थी आँखों में
जिसकी आँखों में लाख चेहरे हैं
उसका चेहरा है मेरी आँखों में
दर्द सारे उभरते जाते हैं
जाने सीलन है कैसी आँखों में
उसके तोहफ़े नहीं किए ज़ाया'
अश्क अब भी हैं मेरी आँखों में
हाए 'अरहम' ये आपका दुख भी
रह न जाए किसी की आँखों में
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