ज़िन्दगी थी मेरी भी आँखों में
जब तलक इक परी थी आँखों में
इस लिए भी ख़ुदा के पास रहा
इक नमाज़न बसी थी आँखों में
जिस की आँखों में लाख चेहरे हैं
उस का चेहरा है मेरी आँखों में
दर्द सारे उभरते जाते हैं
जाने सीलन है कैसी आँखों में
उस के तोहफ़े नहीं किए ज़ाया'
अश्क अब भी हैं मेरी आँखों में
हाए 'अरहम' ये आप का दुख भी
रह न जाए किसी की आँखों में
— Mohd Arham















