इतना भी वक़्त हमको कज़ा ने नहीं दिया
नाकामियों का जश्न मनाने नहीं दिया
हमको यक़ीन अपने बुज़ुर्गो पे है बहुत
चौखट पे सर कहीं भी झुकाने नहीं दिया
मंज़िल की जुस्तजू में परीशाँ थे यार हम
कितना सफ़र था सख़्त बताने नहीं दिया
आँखों में अश्क़ भर के कहा उसने अलविदा
एहसान आँसुओं का उठाने नहीं दिया
दिल ने कहा वतन के लिए जाँ लुटाने जा
मौक़ा मिला तो हमने भी जाने नहीं दिया।
दिल में ही दफ़्न करके रखे अपने दर्दो-ग़म
अश्कों को बेसबब ही लुटाने नहीं दिया
बोसे तमाम चाँद के लेने नज़र से थे
बदली ने छत पे चाँद को आने नहीं दिया
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