इक़रार करने में झिझक या प्यार करने में झिझक
हो प्यार तो कह दो ना क्या इज़हार करने में झिझक
रहता है ग़ुस्सा नाक पर उस ख़ूबसूरत लड़की के
सो होती है इक बार को दीदार करने में झिझक
अच्छाई मेरी भारी थी मेरी बुराई पर तभी
दुश्मन को भी होती थी मुझ पर वार करने में झिझक
कुछ दोस्तों को हम लगे अच्छे फ़क़त था काम जब
होती नहीं उनको ज़रा दीवार करने में झिझक
ये बंद मुठ्ठी बंद ही रहने दो अच्छा है यही
दोनों की बातों को मुझे अख़बार करने में झिझक
उम्मीद का था भार कुछ ज़्यादा कमाने का धरम
दहलीज़ को बेटों को भी है पार करने में झिझक
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by "Dharam" Barot
our suggestion based on "Dharam" Barot
As you were reading Mazhab Shayari Shayari