iqraar karne men jhijhak ya pyaar karne men jhijhak | इक़रार करने में झिझक या प्यार करने में झिझक

  - "Dharam" Barot

इक़रार करने में झिझक या प्यार करने में झिझक
हो प्यार तो कह दो ना क्या इज़हार करने में झिझक

रहता है ग़ुस्सा नाक पर उस ख़ूबसूरत लड़की के
सो होती है इक बार को दीदार करने में झिझक

अच्छाई मेरी भारी थी मेरी बुराई पर तभी
दुश्मन को भी होती थी मुझ पर वार करने में झिझक

कुछ दोस्तों को हम लगे अच्छे फ़क़त था काम जब
होती नहीं उनको ज़रा दीवार करने में झिझक

ये बंद मुठ्ठी बंद ही रहने दो अच्छा है यही
दोनों की बातों को मुझे अख़बार करने में झिझक

उम्मीद का था भार कुछ ज़्यादा कमाने का धरम
दहलीज़ को बेटों को भी है पार करने में झिझक

  - "Dharam" Barot

Mazhab Shayari

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