“अलग थे सोच से”

उतारी है नज़र माँ ने कई बार
ले जाते डाक्टर के पास बाबा
दु'आओं संग चलती माँ मेरी और
सहारा कर्म का रखते थे बाबा
बहस भी होती थी दोनों में काफ़ी
असर हम पर नहीं आता कभीभी
निभाया दौनो ने रिश्ता ब-ख़ूबी
अलग थे सोच से माँ और बाबा
हमें भी देश में करना यही है
अलग है सोच से हम सभी पर
रहेंगे साथ तो आगे बढ़ेंगे

— "Dharam" Barot

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Nazar Shayari

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