'अजब सा मोड़ आया है कहानी में
लगायी है किसी ने आग पानी में
सदाक़त की तरफ़दारी ज़रूरी है
मगर यूँँ फ़ाइदा है कम-ज़बानी में
उड़ाई मौज हमने आसमानों पर
खिलाए गुल कई हमने जवानी में
तिरे जैसा न कोई हम सेफ़र हो तो
सफ़र ये ख़त्म होगा राइगानी में
किसी से भी नहीं जब बात बन पाई
बिता दी 'उम्र हमने ख़ुद-ग़ुमानी में
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