दुश्मनों से भी मिला करते हैं
हम परों को भी सिया करते हैं
पैरों में काँटे चुभाने वाले
हम मुसीबत में हँसा करते हैं
जो प्यासे हैं ज़माने से वो
तिश्नगी को भी पिया करते हैं
भूल जाते हैं हक़ीक़त अपनी
आसमाँ को जो छुआ करते हैं
'इश्क़ देखोगे हमारा कैसे
हम तो ख़्वाबों में मिला करते हैं
दीप वो कैसे जला पाएँगे
जो हवाओं से डरा करते हैं
रूह की ख़ुशबू को वो क्या जाने
हुस्न पे ही जो मरा करते हैं
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