उन दिनों जलता दिया देख के रो देता था

ऐसे चलती थी हवा देख के रो देता था


समाँ पर वो ख़ला, चाँद, सितारे या ख़ुदा
किस को मालूम है क्या देख के रो देता था

चारा-गर तुझ को भुलाने को कहा करते थे
तेरा बीमार दवा देख के रो देता था

वो मुझे हँसता हुआ देख के हंस देती थी
मैं उसे रोता हुआ देख के रो देता था

आइना देख के जिस चेहरे पे हँसता था मैं
उस की आँखों में बना देख के रो देता था

जानता था के उसे पा नहीं सकता मैं कभी
इस लिए उस की अदा देख के रो देता था

— Khan Janbaz

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