मुझे बनाने में सब का ख़र्चा लगा हुआ है

किसी का लोहा किसी का ताँबा लगा हुआ है

कभी थी ठंडी ज़मीन साए से जिन के लोगों
हमारा ऐसे शजर से शजरा लगा हुआ है

नहीं है अपना कोई भी दुनिया जहाँ में लेकिन
किसी को खोने का मुझ को ख़दशा लगा हुआ है

ये तो खिलौना भी जानता है कि टूटना है
अभी खिलौने से एक बच्चा लगा हुआ है

वो शोख़ लड़की हसीन चेहरा कमाल बातें
सुना है उस का किसी से रिश्ता लगा हुआ है

मुझे हमेशा से बैटरी कह के हँसने वाली
तुझे ही तकने से मुझ को चश्मा लगा हुआ है

किसी की आँखें किसी का दिल इतना कह के 'जाँ-बाज़'
वो पूछता है कि तेरा क्या क्या लगा हुआ है

— Khan Janbaz

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