rokta main rah gaya vo door jaata hi raha | रोकता मैं रह गया वो दूर जाता ही रहा

  - Divya 'Kumar Sahab'

रोकता मैं रह गया वो दूर जाता ही रहा
आँधी से दिल के दिये को मैं जलाता ही रहा

सोचता था वो मुझे आकर बचा लेगा मगर
डूब कर मैं मर गया वो आज़माता ही रहा

तोड़ कर ख़ुद को समुंदर के हवाले कर दियासतु मैं उसके समुंदर पर बनाता ही रहा

था पता मुझको यहाँ पर डूबना ही है मुझे
नाव काग़ज़ की समुंदर से भिड़ाता ही रहा

जल गई रस्सी मगर ये हौसला टूटा नहीं
डोर को तलवार से फिर भी लड़ाता ही रहा

जानता था मैं ज़मीं पर आ गिरूँगा एक दिन
भेदने को आसमाँ तितली उड़ाता ही रहा

  - Divya 'Kumar Sahab'

Ummeed Shayari

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