हम-सुख़न नीमजाँ हुआ शायदइक गदाई समाँ बना शायदअब नहीं जज़्ब भा रहा कोईना-रसा रह गया अदा शायदकुछ कभी बच गया गुरेज़ाँ सेबस वही आज भी सज़ा शायदराज़ थे जो गुदाज़ पर्चा मेंसब मिरे बा'द ही जला शायदजाम कह कर पिला दिया क्या येबेमज़ा है नया नशा शायद— Kunu