KHush bahut hai dekhkar vo to burii haalat meri | ख़ुश बहुत है देखकर वो तो बुरी हालत मेरी

  - Lalit Mohan Joshi

ख़ुश बहुत है देखकर वो तो बुरी हालत मेरी
तुम समझते हो यहाँ आसान है उल्फ़त मेरी

रूठ जबसे आइना मुझ सेे गया है तो मुझे
अब नहीं दिखती है भोली सी मुझे सूरत मेरी

यार पहलू में तो तन्हाई बसी है अब बहुत
दोस्त दिल में ही दबी रहती है ये हसरत मेरी

आस मैं क्या ही करूँॅं बाद-ए-सबास अब यहाँ
फूल के ख़ातिर कहीं रोए न ये तुर्बत मेरी

बाग़ तो अब के उजड़ते जा रहे हैं सब यहाँ
बात ये सब बोलने की है ग़लत आदत मेरी

साथ अब कोई यहाँ चलता नहीं है मेरे तो
यार अब देखो फ़रिश्तों संग है सोहबत मेरी

  - Lalit Mohan Joshi

Alone Shayari

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