ख़ुश बहुत है देखकर वो तो बुरी हालत मेरी
तुम समझते हो यहाँ आसान है उल्फ़त मेरी
रूठ जबसे आइना मुझ सेे गया है तो मुझे
अब नहीं दिखती है भोली सी मुझे सूरत मेरी
यार पहलू में तो तन्हाई बसी है अब बहुत
दोस्त दिल में ही दबी रहती है ये हसरत मेरी
आस मैं क्या ही करूँॅं बाद-ए-सबास अब यहाँ
फूल के ख़ातिर कहीं रोए न ये तुर्बत मेरी
बाग़ तो अब के उजड़ते जा रहे हैं सब यहाँ
बात ये सब बोलने की है ग़लत आदत मेरी
साथ अब कोई यहाँ चलता नहीं है मेरे तो
यार अब देखो फ़रिश्तों संग है सोहबत मेरी
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