इक रोज़ हश्र में सभी को होश आएगा

  - Amaan mirza

इक रोज़ हश्र में सभी को होश आएगा
इंसान पागलों की तरह बड़बड़ाएगा

तबदील भी करेगा वो मिट्टी में क़ायनात
मिट्टी में जान डाल के फिर से उठाएगा

लौटेंगे ख़ाली हाथ ही होगा न पैरहन
मंज़िल को वापसी में जब इंसान जाएगा

क्या सोचते थे आप सिफ़ारिश लगाएँगे
महफ़िल सजाने वाला हमें ख़ुद बुलाएगा

अल्लाह तूने बख़्शी है इज़्ज़त मुझे मगर
ये देख कर अज़ीज़ बहुत तिलमिलाएगा

  - Amaan mirza

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