ये शा'इरी जीना मुझे सिखला गई
इक खेल है ये आशिक़ी समझा गई
मैं फिर रहा था मौत अपनी ढूँढ़ते
फिर ज़िंदगी मुझ से कहीं टकरा गई
उस ने मुझे लूटा तो कैसा ग़म मुझे
पर बे-दिली उस की मुझे चौंका गई
प्यारे मेरे जो थे सितारे बन गए
जो बच गए ये रात उन को खा गई
थे चाहने वाले तुम्हें ढेरों मगर
उन की मुहब्बत से भी तुम उकता गई
— Piyush Mishra 'Aab'















