तेरे बिन दिन गुज़ार सकता हूँ
ज़िंदगी तुझ पे वार सकता हूँ
जीतने के लिए यहाँ पर मैं
तीर अपनों के मार सकता हूँ
ख़ास तेरे हैं इस लिए चुप हूँ
वरना सर से उतार सकता हूँ
पेड़ पर छुप के मुझ को कहते हैं
कर तो मैं भी शिकार सकता हूँ
— Amanpreet singh
ज़िंदगी तुझ पे वार सकता हूँ
जीतने के लिए यहाँ पर मैं
तीर अपनों के मार सकता हूँ
ख़ास तेरे हैं इस लिए चुप हूँ
वरना सर से उतार सकता हूँ
पेड़ पर छुप के मुझ को कहते हैं
कर तो मैं भी शिकार सकता हूँ
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