थे मज़े में हम ज़मीं पर ख़ाक परघूमते हैं अब पर तेरे चाक परहै यहाँ पर तीरगी ही तीरगीखो गई है रौशनी अफ़्लाक परबे-सबब आकाश ख़ाली हो गयाचाँद तारे लग गए पोशाक परदो घड़ी को ही हँसी आई उसेफिर उदासी छा गई ग़मनाक परमैं नहीं तो,तू नहीं तो,कौन थालिख गया था इश्क़ जो इदराक पर— Prasoon