अना का टूटना अच्छा किसी के दूर जाने से
जलेगी जान उस के बा'द उस की याद आने से
अहद मिलने का है लेकिन मुझे इतना यक़ीं भी है
अहद को टूट जाना है,डरेगी वो ज़माने से
अगर मुझ पे यक़ीं हो तो मुझे अपनी वफ़ा देना
मैं रिश्ता तोड़ जाऊँगा मुसलसल आज़माने से
हमेशा रूठ ने के बा'द उस को मैं मनाता हूँ
कभी तुर्फ़ा हक़ीक़त से,कभी तुर्फ़ा फ़साने से
निगाह-ए-यार के चश्मक चुभेंगे आ के सीने पर
कमान-ओ-तीर उल्फ़त के न चूके हैं निशाने से
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