सच है वो अंजान नहीं है
पर वो मेरी जान नहीं है
तुम जबसे जग में आए हो
तब से जग वीरान नहीं है
उस के बिन हँसना तो छोडो़
रोना भी आसान नहीं है
जो औरत से नफ़रत करता
सच में वो इंसान नहीं है
हम है तुमपर मरने वाले
तुम को ये भी ध्यान नहीं है
— Kaviraj " Madhukar"















