तुम छोड़ के गए मुझे यूँँ अंधकार में

हम बे-ख़बर हुए हैं यहाँ इंतिज़ार में

माली ने इस बग़ीचे को सींचा नहीं है तो
शायद ही फूल अबकी खिलेंगे बहार में

उस ने छुआ है जबसे व बोसा दिया मुझे
दिल है नहीं तभी से मेरे इख़्तियार में

बस देखना उसे कि नयन भर के देखना
मत पूछो क्या मज़ा है मेरे यार प्यार में

ये किस के आने से तेरे लब मुस्कुरा उठे
जैसे कोई गुलाब खिला बीच ख़ार में

— Rajnish Vishwakarma

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