उस के जाने का था अनुमान बहुत पहले से
ज़िन्दगी कर गया आसान बहुत पहले से
कोई तो है जो तेरी चाहतों का आदी है
जानता हूँ मैं मेरी जान बहुत पहले से
लिख तो दूँ नज़्म मैं भी पहले मेरा दिल टूटे
नज़्म की सोची है उनवान बहुत पहले से
देख के दुख ख़ुशी को अब पता मेरा दे दो
है उदासी मेरी मेहमान बहुत पहले से
कोई है मुझ
में जो अब चाहता है आज़ादी
कोई है मुझ से परेशान बहुत पहले से
— Rajnish Vishwakarma















