उस को भरम है इश्क़ से ये ज़िंदगी गुलज़ार है
कैसी ग़लत-फ़हमी मे है मासूम कितना यार है
वाक़िफ़ नहीं है वो अभी इस इश्क़ की शतरंज से
मोहरे सभी आशिक़ यहाँ सब की मुक़र्रर हार है
बस झूठ बिकता है यहाँ क़िल्लत वफ़ा की है सनम
सच्चा नहीं कोई यहाँ ये झूठ का बाज़ार है
नौ-ए-बशर कोई नहीं जिस को ज़रा भी होश हो
बीमार है लाखों यहाँ पर एक ही आज़ार है
हैरान हूँ मैं देख कर ये सादगी नादान की
है जीत की उम्मीद में उम्मीद ये बेकार है
— Rubball















