जितने भी इस में होने हों हो जाऍं ख़सारे
इंसान मगर राह-ए-मोहब्बत में न हारे
ऐ काश किसी रोज़ यूँ हो जाए मेरे साथ
आ जाए कहीं से वो मेरा नाम पुकारे
उस बे-वफ़ा से कहना कि दीवाने ने तेरे
दिन रात तेरी याद में रो रो के गुज़ारे
हम तुम से जुदा हो गए पर भूले नहीं हैं
ये ज़िन्दगी गुज़री है ख़यालों में तुम्हारे
जिस हाल में हैं आप करें शुक्र ख़ुदा का
हम आप से बद-हाल हैं कुछ लोग बेचारे
— Saif Dehlvi















