mahroom ab talak hooñ jinaan ke khitaab se | महरूम अब तलक हूँ जिनाँ के ख़िताब से

  - Shajar Abbas

महरूम अब तलक हूँ जिनाँ के ख़िताब से
राज़ी नहीं हुआ हूँ मलक के हिसाब से

इस बाब में है वस्ल_ए_मोहब्ब्त का तज़्किरा
बहर-ए-ख़ुदा तुम+इसको हटा दो किताब से।

जिस से तवक़्क़ो तल्ख़ से लहजे की थी मुझे
वो महव-ए-गुफ़्तगू है गज़ब "जी" "जनाब" से

हूँ महव-ए-ख़्वाब-ए-नाज़ में मसरूफ़ आज मैं
मत करिए दूर मुझको जगाकर सवाब से

जिस लड़की से थी मुझको मोहब्ब्त ये देखिए
उस लड़की को थी यार अदावत हिजाब से

ख़ारों से ज़ख़्म खाता है दुनिया में हर कोई
देखो शजर को ज़ख़्म मिला है गुलाब से

  - Shajar Abbas

Dost Shayari

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