बीज नफ़रत की कब दिल में बोऊँगा मैं
कब तलक उसकी यादों को ढोऊँगा मैं
मेरी आँखों को भी अब यही लग रहा
मौत की थपकियों से ही सोऊँगा मैं
कह दो अब याद मुझको न आया करे
कब तलक जान से हाथ धोऊँगा मैं
बंद कर दो ये दरवाज़ें ये खिड़कियाँ
याद आई है वो अब तो रोऊँगा मैं
ख़ौफ़ बर्बादियों का नहीं है मुझे
क्या मिला ही है मुझको कि खोऊँगा मैं
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