beej nafrat ki kab dil men boo'unga main | बीज नफ़रत की कब दिल में बोऊँगा मैं

  - SHIV SAFAR

बीज नफ़रत की कब दिल में बोऊँगा मैं
कब तलक उसकी यादों को ढोऊँगा मैं

मेरी आँखों को भी अब यही लग रहा
मौत की थपकियों से ही सोऊँगा मैं

कह दो अब याद मुझको न आया करे
कब तलक जान से हाथ धोऊँगा मैं

बंद कर दो ये दरवाज़ें ये खिड़कियाँ
याद आई है वो अब तो रोऊँगा मैं

ख़ौफ़ बर्बादियों का नहीं है मुझे
क्या मिला ही है मुझको कि खोऊँगा मैं

  - SHIV SAFAR

Maut Shayari

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