karta hai ab bhi nafrat dil ye kya samjhe | करता है अब भी नफ़रत दिल ये क्या समझे

  - SHIV SAFAR

करता है अब भी नफ़रत दिल ये क्या समझे
या'नी आज भी प्यार है तुम से क्या समझे

कहते हो जिस खेल का ख़ुद को तुर्रम खाँ
उसका किया आग़ाज़ हमीं ने क्या समझे

अभी तो ज़िंदा हूॅं लेकिन वो लौटा तो
मर जाऊॅंगा सिर्फ़ ख़ुशी से क्या समझे

छोड़ के जाने वाले तुम अपनी सोचो
हम जी लेंगे जैसे तैसे क्या समझे

उसके आँसू देख के इतनी ख़ुशी हुई
हँसता रहूँगा आज अभी से क्या समझे

मेरी बुराई मत जानो तो बेहतर है
थक जाओगे गिनते गिनते क्या समझे

जाने दो जो लोग न मेरे हो पाएँ
वो क्या होंगे और किसी के क्या समझे

  - SHIV SAFAR

Dushman Shayari

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