“अब तू नहीं”

अब मेरे पास तू नहीं रहती
तेरी यादों ने घेर रक्खा है
इस भरोसे पे मैं भी बैठा था
अब मेरी पूरी आरज़ू होगी
मेरी जानिब को मुस्कुराती हुई
तेरी यादों के पीछे तू होगी
मैं बहुत देर तक था बैठा रहा
अब्र छाने लगे थे आँखों पे
ग़ौर ख़ुद पर किया तो क्या पाया
मेरी आँखों में चंद आँसू थे
यादें मुझ को रुला के चल भी गईं
और मुझ को ख़बर हुई ही नहीं
बावजूद इस के मैं वहीं बैठा था
जाने अब मुझ को देखना क्या था
मैं ख़यालों से होश में जब आया
ख़ुद को फिर से मैं तन्हा ही पाया
कल तू फिर याद मुझ को आएगी
फिर मैं उम्मीद ले के बैठूँगा
कल रुलाएँगी फिर तेरी यादें
फिर से तन्हा मैं ख़ुद को पाऊँगा
फिर भी वा'दा है तेरी यादों से
चैन मुझ को न अब कहीं होगा
जब तलक आ न जाएगी तू ख़ुद
सिलसिला ख़त्म ये नहीं होगा
अब मेरे पास तू नहीं रहती
तेरी यादों ने घेर रक्खा है

— SHIV SAFAR

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