कोई चारा-गर न कोई है दवा अब
जो है तो बस हौसला है आपका अब
दौर आया है अजब ये सिसकियों का
मौत बन कर फिर रही क़ातिल हवा अब
सामने है मौत पीछे ज़िन्दगी है
सच बताओ कौन कितना है बड़ा अब
रौशनी से तीरगी है हारती आई
कुछ नहीं है इस कहानी में नया अब
ख़ाली ख़ाली था खंडर सा आशियाना
साथ सब आए तो घर ये घर बना अब
सब के सब मतलब से अपने काम लेते हैं
सोचता है क्या कोई अच्छा बुरा अब
मर गए सारे जो हिस्सेदार थे "श्री"
है नहीं कुछ हाथ में सब कुछ गया अब
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