तुम कहीं मुझ सेे मिलो तो मेरे ख़्वाबों के सिवा
मेरे आँगन में भी सब कुछ है गुलाबों के सिवा
दूर से सहरा चमकता दिखता है लेकिन वहाँ
उस जगह कुछ भी नहीं होता सराबों के सिवा
मीर ग़ालिब फ़ैज़ साहिर और इक वो जौन की
एक शाइ'र क्या ही चाहे इन किताबों के सिवा
— Shubham Vaishnav















