मिलो तुम कभी, यूँँ बुलाता नहीं है
यही दुख सहा और, जाता नहीं है
बता अब करूँ तो करूँ और क्या मैं
सिवा प्यार कुछ काम, आता नहीं है
जिसे सोच कर, मौत तक से लड़े हम
उसी ने कहा ख़ास, नाता नहीं है
अदावत करे लाख दुश्मन मगर वो
फ़रेबी मोहब्बत दिखाता नहीं है
इबादत करूँ क्यूँ करूँ तेरी पूजा
अदम है, जहाँ का विधाता नहीं है
'अतुल' एक नाकाम इंसान है तू
दुआ के सिवा कुछ, कमाता नहीं है
— Udit Narayan Mishra















