इश्क़ को फ़लसफ़ा समझते थे
हिज्र को मुब्तला समझते थे
ऐ ख़ुदा वो भी बे-वफ़ा निकला
वो जिसे हम ख़ुदा समझते थे
बे-वफ़ाई वो भी उन्हीं के साथ
जो तुझे बावफ़ा समझते थे
तुझी ने कर दिया हमें बीमार
तुझी को हम दवा समझते थे
— Vineet Dehlvi
हिज्र को मुब्तला समझते थे
ऐ ख़ुदा वो भी बे-वफ़ा निकला
वो जिसे हम ख़ुदा समझते थे
बे-वफ़ाई वो भी उन्हीं के साथ
जो तुझे बावफ़ा समझते थे
तुझी ने कर दिया हमें बीमार
तुझी को हम दवा समझते थे
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