बोझ इस दिल पर जब ज़्यादा हो जाता है
रो लेता हूँ दिल हल्का हो जाता है
इस लिए मेरे पास नहीं आते हैं लोग
जो भी आता है मुझ सा हो जाता है
डरते क्यूँ हैं सपने देखा करिए ना
सपना देखो तो पूरा हो जाता है
हम मुफ़लिस हैं कैसे इश्क़ निभाएँ यार
इश्क़ यहाँ हर दिन महँगा हो जाता है
हिज्र के आँसू हैं हल्के में मत लेना
जब ये गिरें सहरा दरिया हो जाता है
लोगों को आईना दिखला के देखो
फिर देखो चेहरा कैसा हो जाता है
वक़्त बिताओ यार अपने माँ बाप के साथ
वक़्त बुढ़ापे में धीमा हो जाता है
— Yuvraj Singh Faujdar















