"मेरी मोहब्बत "

तुम्हें पाने की जिद्द मुझे न तुम्हारी आदत है
ये मेरा तरीका है ये मेरी मोहब्बत है
शौक से जुदा हो जाना जब तुम्हारा जी चाहे
गर मर्ज़ी हो तुम्हारी तो मेरी इजाज़त है

हाँ, झूठ है जो मैं ने कहा है अभी अभी
हाँ, झूठ है जो तुम ने सुना है अभी अभी
तुम्हें पाने को दिल बागी है मेरा भी
मगर किस से करूँ जो दिल में बग़ावत है
शौक से जुदा हो जाना जब तुम्हारा जी चाहे
गर मर्ज़ी हो तुम्हारी तो मेरी इज़ाज़त है

— Vikas Sangam

More by Vikas Sangam

Other nazm from the same pen

See all from Vikas Sangam →

Aadat Shayari

Shers of aadat.

All Aadat Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling