apne 'ishq pe bhi ham istitaar karte hain | अपने 'इश्क़ पे भी हम इस्तितार करते हैं

  - Sabir Hussain

अपने 'इश्क़ पे भी हम इस्तितार करते हैं
और लोग हिज्रत का इश्तिहार करते हैं

कितनी प्यारी बातें ये ख़्वाब-कार करते हैं
और हम भी सपनों पे ए'तिबार करते हैं

उसको बख़्शा हालातों ने मकाम लैला का
हम भी मजनूँ होने का इंतिज़ार करते हैं

ये समझने में इक अरसा ही लग गया हमको
'इश्क़ तो फकत ये आली-तबार करते हैं

तेरी दोस्ती तो महँगी पड़ी है चारा-गर
ज़ख़्म हर-सू अब मेरा इंतिज़ार करते हैं

करना गर पड़े बे-पर्दा हमें उसे साबिर
हम तो ऐसी शोहरत से दरकिनार करते हैं

  - Sabir Hussain

Judai Shayari

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