चाहता हूँ कि दूजी राह मिले
राह-ए-उल्फ़त में सब तबाह मिले
ज़िद है मेरी वहीं रुकूँगा मैं
'उम्र भर को जहाँ पनाह मिले
बेवफ़ा हो तो भी दुआ ले लो
आपको 'इश्क़ बे-पनाह मिले
इसलिए बन गया हूँ मैं रहबर
दूसरों को सहीह राह मिले
बेवफ़ाई नहीं की है मैंने
कहने को पर कोई गवाह मिले
शहर को शहर-ए-इश्क़ कैसे कहूँ
हर जगह मुझको क़त्ल-गाह मिले
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