हुस्न वालों में सभी को शंग होना चाहिए

और इस के साथ ही नव-रंग होना चाहिए

अंजुमन में आएँगे तो दाद भी देंगे मगर
हर सुख़न-वर शर्त है ख़ुद-रंग होना चाहिए

मैं ज़माने में अगर मंसूब था तो तुम से था
क़ब्र में भी तुम को मेरे संग होना चाहिए

तीस दिन में एक दिन ही दिल पे दस्तक देते हो
इश्क़ करने का कोई तो ढंग होना चाहिए

मुझ से ही मंसूब है इस मुल्क की मिट्टी तो फिर
इस तिरंगे में भी मेरा अंग होना चाहिए

— Prashant Kumar

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