pesh jo aaya sar-e-saahil-e-shab batlaaya | पेश जो आया सर-ए-साहिल-ए-शब बतलाया

  - Ajmal Siraj

पेश जो आया सर-ए-साहिल-ए-शब बतलाया
मौज-ए-ग़म को भी मगर मौज-ए-तरब बतलाया

रंग महफ़िल का अजब हो गया जिस दम उस ने
ख़ामुशी को भी मेरी हुस्न-ए-तलब बतलाया

है बताने की कोई चीज़ भला नाम-ओ-नसब
हम ने पूछा न कभी नाम-ओ-नसब बतलाया

दिल को दुनिया से सरोकार कभी था ही नहीं
आँख ने भी मगर उस रुख़ को अजब बतलाया

यूँ ही आया था तेरा ज़िक्र कहीं और हम ने
जो तेरे बाब में मालूम था सब बतलाया

ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल'
क्या करेंगे जो उदासी का सबब बतलाया

  - Ajmal Siraj

More by Ajmal Siraj

As you were reading Shayari by Ajmal Siraj

Similar Writers

our suggestion based on Ajmal Siraj

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari