tumhaare dil ki tarah ye zameen tang nahin | तुम्हारे दिल की तरह ये ज़मीन तंग नहीं

  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah

तुम्हारे दिल की तरह ये ज़मीन तंग नहीं
ख़ुदा का शुक्र कि पाँव में अपने लंग नहीं

अजीब उस से तअ'ल्लुक़ है क्या कहा जाए
कुछ ऐसी सुल्ह नहीं है कुछ ऐसी जंग नहीं

कोई बताओ कि इस आइने का मोल है क्या
जिस आइने पे निशान-ए-गुबार-ओ-ज़ंग नहीं

मिरा जुनून है कोताह या ये शहर-ए-तबाह
जो ज़ख़्म-ए-सर के लिए याँ तलाश-ए-संग नहीं

हैं सारे क़ाफ़िला-सालार सब हैं राह-नुमा
ये क्या सफ़र है जो कोई किसी के संग नहीं

जो कुछ मता-ए-हुनर हो तो सामने लाओ
कि ये ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग नहीं

  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah

Dil Shayari

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