main to rastaa ban jaaunga tum manzil ban paoge kya | मैं तो रस्ता बन जाऊँगा तुम मंज़िल बन पाओगे क्या

  - Ankit Yadav

मैं तो रस्ता बन जाऊँगा तुम मंज़िल बन पाओगे क्या
उन देरीना राहों पे भी मुझ सेे मिलने आओगे क्या

शीशा हो या दिल हो कोई दोनो में तुम ही रहते हो
गर मुझ सेे शीशा टूटा तो तुम दिल में दिख जाओगे क्या

ये जो तुम करते रहते हो बे-मतलब की बातें मुझ सेे
इन सारी बातों का मतलब तुम मुझको समझाओगे क्या

जिस महफ़िल में सबकी नज़रें बस तुम पे आ के रुकती हों
मेरी सफ़ में आ बैठे हो तुम मुझको मरवाओगे क्या

  - Ankit Yadav

Jashn Shayari

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