goonjti waa | गूँजती वादी में आवाज़ अभी बाक़ी है

  - Aleena Itrat

गूँजती वादी में आवाज़ अभी बाक़ी है
तार टूटे हैं तो क्या साज़ अभी बाक़ी है

फिर ज़मीं खींच रही है मुझे अपनी जानिब
मैं रुकूँ कैसे कि पर्वाज़ अभी बाक़ी है

मौत से पहले मिरी मौत को लिखने वाले
मेरे अंजाम का आग़ाज़ अभी बाक़ी है

तू इधर है कि नहीं इतना बता दे मुझ को
सारे पर्दे उठे पर राज़ अभी बाक़ी है

वक़्त ने गर्द किया फूल से चेहरों का जमाल
पर अदा बाक़ी है अंदाज़ अभी बाक़ी है

  - Aleena Itrat

Phool Shayari

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