jis tarah waqt guzarne ke li.e hota hai | जिस तरह वक़्त गुज़रने के लिए होता है

  - Ali Zaryoun

जिस तरह वक़्त गुज़रने के लिए होता है
आदमी शक्ल पे मरने के लिए होता है

तेरी आँखों से मुलाक़ात हुई तब ये खुला
डूबने वाला उभरने के लिए होता है

'इश्क़ क्यूँँ पीछे हटा बात निभाने से मियाँ
हुस्न तो ख़ैर मुकरने के लिए होता है

आँख होती है किसी राह को तकने के लिए
दिल किसी पाँव पे धरने के लिए होता है

दिल की दिल्ली का चुनाव ही अलग है साहब
जब भी होता है ये हरने के लिए होता है

कोई बस्ती हो उजड़ने के लिए बसती है
कोई मज़मा हो बिखरने के लिए होता है

  - Ali Zaryoun

Nigaah Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ali Zaryoun

As you were reading Shayari by Ali Zaryoun

Similar Writers

our suggestion based on Ali Zaryoun

Similar Moods

As you were reading Nigaah Shayari Shayari