जिस तरह वक़्त गुज़रने के लिए होता है
आदमी शक्ल पे मरने के लिए होता है
तेरी आँखों से मुलाक़ात हुई तब ये खुला
डूबने वाला उभरने के लिए होता है
'इश्क़ क्यूँँ पीछे हटा बात निभाने से मियाँ
हुस्न तो ख़ैर मुकरने के लिए होता है
आँख होती है किसी राह को तकने के लिए
दिल किसी पाँव पे धरने के लिए होता है
दिल की दिल्ली का चुनाव ही अलग है साहब
जब भी होता है ये हरने के लिए होता है
कोई बस्ती हो उजड़ने के लिए बसती है
कोई मज़मा हो बिखरने के लिए होता है
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